लखनऊ सुपरजाइंट्स को ऐसा क्यों लगता है कि उनकी कप्तान बदलने से वह ट्रॉफ़ी जीत जाएंगे | why do the Lucknow super giants feel dad, changing their captain Will help them win the trophy ?

जब से लखनऊ सुपरजाइंट्स इस टूर्नामेंट में अपनी टीम को लाया है तब से लेकर अब तक वे लोग एक बार भी ट्रॉफी को अपने नाम नहीं कर पाए तो उन्हें लगता है कि गलती उनकी कप्तान में हैं जिनकी वजह से टीम ने ख़राब पर हमेशा रही है और तो और हम लोग फ़ाइनल में नहीं जा पा रही तो उन्हें सबसे पहले हम बता दें कि सारी गलतियां कप्तान के अंदर नहीं होती कुछ गलतियां टीम के मालिक के अंदर भी होती है उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए किसी भी खिलाड़ी के साथ की कुछ भी बोल दे ख़राब परफॉर्मेंस के ऊपर या अच्छे परफॉर्मेंस को पर टिप्पणियाँ नहीं देनी चाहिए बाक़ी सभी टीम के मालिक ऐसा नहीं करते हैं कप्तान के साथ उनकी बातचीत थोड़ी कम होती है लेकिन लखनऊ सुपरजाइंट्स के मालिक के साथ ऐसा नहीं है वह तुरंत ग़ुस्सा हो जाते हैं एक गलती की वजह से उन्हें कप्तान को नहीं कुछ बोलना चाहिए मैच है इसकी हाज़िर तो लगा चाहता है लेकिन लखनऊ सुपरजाइंट्स के मालिकों थोड़ी सी गलती दिखती नहीं है कि वह सीधे कप्तान के ऊपर ग़ुस्सा हो जाते आग बबूला हो जात भाई उन्हें आप खेलने का मौक़ा 2 अच्छी तरीक़ा से आपको पता होगा कि जब लखनऊ सुपरजाइंट्स नया टीम बनी थी तो उस वक़्त के कप्तान KL राहुल थे और आपको पता होगा कि जब केल राहुल टीट्वेंटी में बैटिंग करते हैं तो उस वक़्त उनका स्ट्राइक रेट थोड़ा कम होता है जिसकी वजह से गोयनका साहब को थोड़ा लगा कि कप्तान साहब धीमा खेल रहे लेकिन उन्हें हम बता दें कि के राहुल का बैटिंग का इस्राईली सालों से शुरुआत होती है अब बाद में जाकर अच्छे खासे रन बन जाते हैं लेकिन केल राहुल 1 दो बार ज़ीरो पर आउट हो गए और थोड़ा धीमा खेल गए तो जिसकी वजह से उनके मालिक की उनको पूरी मैदान के सामने खरी खोटी सुना दिया जिसकी वजह से भाई कोई भी बड़ा खिलाड़ियों आप उसे ऐसा नहीं हो सकते उन्हें ख़राब लगा उनकी ब्रांड के ऊपर सवाल भी उठता है तो KL राहुल ने लगभग सुपरजाइंट्स को छोड़कर नीलामी में आना चाहा उसके बाद से वह दिल्ली कैपिटल्स की तरफ़ से खेल रहे

स्टेडियम में केल राहुल को गोयनका साहब ने श्लो खेलने के कारण उन्हें कुछ बोल दिया था

गोयनका सात को राहुल के बारे में ऐसा नहीं बोलना चाहिए था जब राहुल ने ज़ीरो पर आउट हुआ तो उनके मालिक ने उन्हें बीच में आकर कुछ बोल दिया और आपको पता होगा कि किसी भी खिलाड़ी था जब ख़राब फ़ॉर्म चलता है तो उनको आकर सपोर्ट करना चाहिए ना कि उनके बारे में कुछ बोलना चाहिए और ऐसे में राहुल को ख़राब लगा जिसकी वजह से उन्होंने मालिक से बोल दिया अब हम आपकी टीम में नहीं खेलने वाले हैं और उन्होंने अपना नाम रख लो सुपर जायंट्स से वापस लेगी और उसके बाद से नीलामी में आएँ और डेली कैपिटल समूह ने अपनी टीम में शामिल कर लिया उसके बाद से ही जो हुआ वह देखी रही है दिल्ली की तरफ़ से आर फिर राहुल बोत अच्छे मिलते हैं लेकिन इनके मालिक ऐसा लगता है कि कप्तान बदलने से सारी चीज़ें ठीक हो जाती है लेकिन ऐसा नहीं है आप आप गोयनका सात को राहुल के बारे में ऐसा नहीं बोलना चाहिए था जब राहुल ने ज़ीरो पर आउट हुआ तो उनके मालिक ने उन्हें बीच में आकर कुछ बोल दिया और आपको पता हुआ है कि किसी भी खिलाड़ी था जब ख़राब फ़ॉर्म चलता है तो उनको आकर सपोर्ट करना चाहिए ना कि उनके बारे में कुछ बोलना चाहिए और ऐसे में राहुल को ख़राब लगा जिसकी वजह से उन्होंने मालिक से बोल दिया अब हम आपकी टीम में नहीं खेलने वाले हैं और उन्होंने अपना नाम रख लो सुपर जायंट्स से वापस लेगी और उसके बाद से नीलामी में आएँ और डेली कैपिटल्स ने उन्हें अपनी टीम में शामिल कर लिया उसके बाद से ही जो हुआ वह देखी रही है दिल्ली की तरफ़ से आखर राहुल बोत अच्छे खेलते हैं लेकिन इनके मालिक को ऐसा लगता है कि कप्तान बदलने से सारी चीज़ें ठीक हो जाती है लेकिन ऐसा नहीं है

अब लखनऊ सुपरजाइंट्स के कप्तान रिषभ पंत उन्हें भी गोयनका साहब कुछ बोल दिया

को पता ही होगा रिषभ पंत वायट बॉल में उनका भी स्ट्राइक रेट थोड़ा सा कम होता है और अभी व थोड़ा ख़राब फ़ॉर्म से गुज़र रहे हैं लेकिन किसी भी खिलाड़ी था ख़राब फ़ॉर्म कुछ ही दिनों का होता है उस वक़्त उन्हें कुछ नहीं बोलना चाहिए लेकिन उनकी माली को ऐसा लगता नहीं है उनके मालिक तुरंत रिएक्ट कर देती है इसकी वजह से सारी चीज़ें ख़राब हो जाती है किसी भी खिलाड़ी को खेलने का मौक़ा देना चाहिए और जब मौक़ा खेलने कब दे रहे हैं तो उस वक़्त उन्हें कुछ बोलना नहीं चाहिए और गोयनका साहब को ऐसा लगता नहीं है वो कुछ भी ख़राब देखते हैं तो उस वक़्त अपना ग़ुस्सा दिखा देते हैं खिलाड़ी कूपर और खिलाड़ी को ग़ुस्सा पसंद नहीं आता है क्योंकि उनकी भी प्रश्नल होती है और प्रोफ़ेशनल और वे लोग भी नहीं चाहते हैं कि उनकी ख़राब फ़ॉर्म में उन्हें कोई आकर बोली जब किसी भी खिलाड़ी का अच्छा फ़ोन होता है तो आप उसे कुछ भी बोलते हैं तो उसको सारी चीज़ें अच्छी लगती है लेकिन जब उस खिलाड़ी का खाना अब फ़ॉर्म चल रहा होता है तो उसे कितना भी अच्छा चीज़ बोली में तू से ख़राबी लगेगा तो ऐसे में बेहतर होता है कि आप चुपचाप मैच को देखें आराम से बाद में कभी आपको मौक़ा लगे सारी चीज़ें जब ठीक हो जाती तब आपको भूलना चाहिए लेकिन इनके मालिक का ऐसा नहीं उसके मालिक तुरंत उसी वक़्त उन्हें बोलना ज़रूरी होता है और उसी वक़्त के मतलब होता है तो उस खिलाड़ी गुप्त प्रेशर ज़्यादा होता है उसे बुरा लग जाता है इसकी वजह से गोयनका साहब से नाराज़ हो जाता और नाराज़ होने का मतलब उसकी परफॉर्मेंस और भी दिन पर दिन ख़राब होती जाती है ऑफ़िसर पद के साथ भी वही हुआ उनकी मालिक ने उन्हें बीच मैदान में बोल दिया इतने पैसे मित्र में हमने ख़रीद कर लाया है और तुम ऐसा कर रही हो मैदान पर एक भी मैच नहीं जीत रही हूँ हमारी टीम के लिए

निष्कर्ष

लखनऊ सुपरजाइंट्स मैं जब भी एक छोटी गलती कप्तान सिंह हो जाती है तो उनके मालिकों ने आकर सुनाकर चले जाते हैं लेकिन आपको पता होगा कि इस टूर्नामेंट में कोई भी टीम जीत में कोई भी टीम हारी तो भी वह लोग पूर्व टीम के मालिक ID में रखते हैं तो उन्हें कुछ बोला नहीं चाहिए था सबसे बड़ी बात आपको पैसे के लिए ही कुछ करना पड़ता है और जब आपको कुछ किये बिना ही पैसे आपको मिल रहे हैं तो उस वक़्त आपको शांत रहना चाहिए आपके 1 जीतने और खाने से आपकी टीम की बड़ी इज़्ज़त बनती थी एवं बिगाड़ दिया और आपको पता होगा कि कोई मालिक खिलाड़ी के बीच में आता है तो चीज़ें धीरे धीरे ख़राब होने लगती है सभी टीम के मालिक मैच देखने आते हैं लेकिन वह कप्तान के साथ उतनी बातें नहीं करते थोड़ा बोहोत पूछ लिया यहाँ तक कि होता है लेकिन उनकी खेलने का तरीक़ा और खेलने का अंदाज़ या पर पब्लिक स्कूल पर उन्हें कुछ नहीं बोलना चाहिए ये सारी चीज़ें उनके दिमाग़ में ख़राब संकेत देता है और जब किसी भी खिलाड़ी को ख़राब लगता है तो उसकी परफॉर्मेंस और भी ख़राब होती जाती है तो टीम के मालिक खिलाड़ी से कम मिले और खिलाड़ी से कम बात करे सिर्फ़ उनका गेम देगी आपको अच्छा नहीं लग रहा है तो आप नए साल दूसरे खिलाड़ी को ले आए वो अच्छी बात होती है लिखना खिलाड़ी को डायरेक्ट बोल देना अच्छी नहीं खेल रहे हो आप का परफॉर्मेंस ख़राब है ये ग़लत होता है और भी बहुत सारी टीम है इस टूर्नामेंट लेकिन अपनी कहीं देखा है कि चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान एक मैच हार गए थे उसके मालिक आकर महेंद्र सिंह धोनी को सुना रही ऐसा नहीं होता है यहाँ तक कि मुम्बई इंडियंस के कप्तान रोहित शर्मा बीच मैच हार जाते हैं उनके मालिक उनको नहीं सुनाते हैं उन्हें पता होता है कि भाई 1 मैच ख़राब जाति सामने वाली टीम थोड़ा ज़्यादा मेहनत किया ज़्यादा छक्के लिया इतना जीत गये तो कहीं दिक़्क़त है लेकिन जैसा सुपरजाइंट्स के साथ ऐसा नहीं है उनके मालिक उन्हें तुरंत आ कर सुना देते हैं जिसकी वजह से जब आग लगा होता है तो उसके ऊपर ये घी का काम करता है

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