जब इस टूर्नामेंट की शुरुआत हुई थी तो हर एक के पास एक आईकॉनिक प्लेयर होता था सभी टीमों के पास अपना अपना एक आईकॉनिक गया था जैसे मुंबई इंडियन्स के पास सचिन था ऐसे में चेन्नई सुपरकिंग्स के पास कोई भी आईकॉनिक प्लेयर नहीं था तो उन्होंने धोनी कों बनाया और जब धोनी नीलामी में आए थे तो सभी टीमों ने उनके ऊपर बोली लगायी थी जिसके बाद से महेंद्र सिंह धोनी उस सीज़न की सबसे महंगे खिलाड़ी बन गए थे तो चेन्नई सुपर किंग्स ने उनको अपना आईकॉनिक प्लेयर बनाएँ और यहाँ से शुरुआत होती है महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी चेन्नई सुपर किंग्स और शुरुआती सीज़न महेंद्र सिंह धोनी कुछ ख़ास नहीं कर पाए क्योंकि पहले सीज़न का विनर राजस्थान रॉयल्स रही थी और उसके बाद से महेंद्र सिंह धोनी अपने आप को कम बैक किया और चेन्नई सुपर किंग्स को हर बार प्ले ऑफ़ में क्वालीफाई करवाती और पाँच भाई अपनी कप्तानी के अंदर चीनी पर PM को प्रॉफिट दिलायी जिसके बाद से पूरी दुनिया उनको ट्रॉफ़ी क्रिकेटर ने कहा कि नाम सामने लगा और हम ऐसा इसलिए बात कर रही थी सभी टीमों के पास नक़दी क्लियर होने के बाद वे लोग अपना ट्रॉफ़ी नहीं जी पाते गुळ होने के साथ साथ चेन्नई सुपर किंग्स का ब्रांड बेटी भी बड़ा और उसके बाद सेउसके बाद से ही महेंद्र सिंह धोनी अपने आप को कम बैक किया और चेन्नई सुपर किंग्स को हर बार प्ले ऑफ़ में क्वालीफाई करवाती और 5 trophy कप्तानी के अंदर दिलायी ऐसा इसलिए बात कर रही थी सभी टीमों के पास 1 और प्लेयर होने के बाद वे लोग अपना ट्रॉफ़ी नहीं जी पाते धोनी होने के साथ साथ चेन्नई सुपर किंग का ब्रांड और भी बड़ा और उसके बाद से चेन्नई सुपरकिंग्स के फैंस बढ़ने लगी

महेंद्र सिंह धोनी चेन्नई सुपर किंग्स की कप्तानी के साथ फिनिशर का भी काम किया है
सभी टीमों के पास जितनी भी कप्तान उसमें सिर्फ़ एक ख़ास बात होती ही यातो बैटिंग करते हैं या तो बॉलिंग लेकिन धोनी के लिए ऐसा नहीं था बैटिंग करते हैं विकेटकीपिंग भी करते हैं कप्तान है इतने सारे काम सिर्फ़ एक बंदा करता है अपनी टीम के लिए सबसे बड़ी अपनी टीम का ऐसा फील्डिंग सेट करता था सामने कोई भी टीम हुआ इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था 1 सी बड़े कर 1 योद्धा आयी सामने इनकी लेकिन सब के सब हार कर दिया जिसकी वजह से उनकी टीम ने लगातार जब से महेंद्र सिंह धोनी शुरुआती दौर से आख़िरी दौर की जब तक चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान की तब तक चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए 5 ट्रॉफी जीतकर दिलायी इनकी टीम जब भी मुश्किल दौर में फँसी है तब महेंद्र सिंह धोनी ने अपने बल्ले से आ इस टीम को बचाया इसलिए लोग कहते हैं कि जब बिछड़े से की गई BSE दोनों की ज़रूरत पड़ी है तब तक महेंद्र सिंह धोनी के लिए सुपर किंग्स के लिए आकर बल्लेबाज़ी की और आख़िरी समय में ज़बर्दस्त फ़ॉर्म में 25 रण बनाने की ज़रूरत पड़ती थी तो महेंद्र सिंह धोनी बनाकर दिया करते थे और महेंद्र सिंह धोनी की सबसे बड़ी ख़ास बात यह है कि उस समय के इंडिया टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी हुआ करते थे तो महेंद्र सिंह धोनी के अंदर अनुभव भी बोहोत ज़्यादा था बेटियों से बड़ी टीम के साथ खेला जाता है महेंद्र सिंह धोनी ने ऑस्ट्रेलिया जैसी बड़ी टीम को भी नाक में दम कर रखा था महेंद्र सिंह धोनी चेन्नई सुपर किंग्स के लिए सिर्फ़ एक खिलाड़ी ने एक ही मौसम भी थी उन्हें चेन्नई सुपर किंग्स में हाला कह कर बुलाया जाता था और ताला का मतलब होता बड़ा या बड़ा भाई चेन्नई तरफ़ लोग उन्हें था लागत पर बुलाया करते हैं और महेंद्र सिंह धोनी ने चेन्नई के लिए बोहोत सारी मैच बनाकर दिए हैं और जब भी इस टीम को महेंद्र सिंह धोनी की ज़रूरत पड़ी है आख़िरी दम तक महेंद्र सिंह धोनी ने टीम के साथ खड़ा रहा है
इतनी बड़ी टूर्नामेंट में एक ट्रॉफी भी जीतना मुश्किल होता था वहाँ पर महेंद्र सिंह धोनी ने पाँच ट्रॉफ़ी अपनी टीम के लिए जीता है
सब कुछ पता होता है कि इतनी बड़ी टूर्नामेंट में भी रॉकी भी टीम को जीतना मुश्किल होता है आपने देखा होगा कि कैसे बेंगलुरू ने 18 साल लग गए थे एक ट्रॉफी जीतने के लिए तो आपको पता होगा इतनी बड़ी कॉम्पटीशन वाले क्षेत्र में एक टॉपिक कितनी बड़ी और कितनी मुश्किल होती है जितना ऐसे में महेंद्र सिंह धोनी ने चेन्नई सुपरकिंग्स का इतना काम आसान किया था 5 ट्रॉफ़ी अपने नाम किया इससे यह पता चलता है कि महेंद्र सिंह धोनी इतने बड़े खिलाड़ी और कितनी बड़ी कप्तान और आप चेन्नई सुपर किंग्स को हर बार टॉप 4 में ज़रूर देखे ते थे महेंद्र सिंह धोनी के टीम में ज़रूरी या नहीं होता था कि इस टीम का फ़ॉर्म चल रहा ही नहीं चलता इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था जब वो ही लोग महेंद्र सिंह धोनी की टीम में आ जाते थे तो पता नहीं उनके अंदर एस यहाँ चीज़ें हो जाती थी कि उनके अंदर वो फ़ॉर्म पुराना वाला फिर से आ जाता था और वे लोग अच्छा परफॉर्मेंस देकर चेन्नई सुपरकिंग्स को फ़ाइनल तक ले जाया करती थी चेन्नई सुपरकिंग्स ही एक ऐसी टीमें हैं जो अब तक सबसे ज़्यादा बार फ़ाइनल खेल चुकी है इस टूर्नामेंट और चेन्नई सुपर किंग्स इलेवन एसी हुआ करता था कि जब भी IPL की शुरूआत हो तो हर किसी के दिमाग़ में सिर्फ़ एक ही नाम चलता था कि महेंद्र सिंह धोनी की टीम चेन्नई सुपर की हर बार ज़रूर फ़ाइनल में खेलेंगी यह लोगों का विश्वास हो गया थामहेंद्र सिंह धोनी के टीम में ज़रूरी या नहीं होता था कि किस टीम का फ़ॉर्म चल रहा ही नहीं चलता इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता था जब वो ही लोग महेंद्र सिंह धोनी की टीम में आ जाते थे तो पता नहीं उनके अंदर आसिफ़ यहाँ चीज़ें हो जाती थी कि उनके अंदर वो फ़ॉर्म पुराना वाला फिर से आ जाता था और वे लोग अच्छा परफॉर्मेंस देकर चेन्नई सुपरकिंग्स को फ़ाइनल तक ले जाया करती थी चेन्नई सुपर किंग ही एक ऐसी टीम में ही जो अब तक सबसे ज़्यादा बार फ़ाइनल खेल चुकी है इस टूर्नामेंट और चेन्नई सुपर किंग्स एक लेंगे सी हुआ करता था कि जब भी IPL की शुरूआत हो तो हर किसी के दिमाग़ में सिर्फ़ एक ही नाम चलता था कि महेंद्र सिंह धोनी की टीम चेन्नई सुपर की हर बार ज़रूर फ़ाइनल में खेलेंगी यह लोगों का विश्वास हो गया था

निष्कर्ष
इस टूर्नामेंट में 1 बढ़कर एक खिलाड़ी हुआ करते थे और एक बढ़कर एक टीम हुआ करती थी हर एक टीम में बड़े बड़े नामों को ज़रूर देखने को मिलते थे लेकिन उसे महेंद्र सिंह धोनी को कोई फ़र्क नहीं पड़ता था जब सीज़न की शुरुआत होती थी तो सब कोई बोल देते हमारी टीम अच्छी है हमारी टीम अच्छी लेकिन जब शुरुआत होने के बाद जब आख़िरी पड़ाव पर टूर्नामेंट पहुँचता था तो सिर्फ़ सबको 1 ही चीज़ें तिथि महेंद्र सिंह धोनी की टीम क्योंकि उनकी टीम हर बार फ़ाइनल में खेलने की अपनी जगह बना लिया करती थी और ऐसा देखते देखते चेन्नई सुपर किंग्स 1 बहुत बड़ी टीम बन गई क्योंकि इन लोगों के पास पाँच पाँच ट्रॉफ़ी हाथ हो गई थी महेंद्र सिंह धोनी की टीम ने बड़े बड़े खिलाड़ी आया करते थे लेकिन उनका उम्र भी काफ़ी ज़्यादा हो जाती थी इसकी वजह से लोगों को लगता था कि इनकी उम्र बड़ी हो गई अब ये लोग खेल पाएंगे महेंद्र सिंह धोनी सबकी मुँह बंद किया करते थे उनकी परफॉर्मेंस फिर से वापस लाकर उन्हें पता नहीं ऐसा क्यों मेंटेन किया कथित या कि क्या सिखाया करते थे जिसकी वजह से हरेक खिलाड़ी ने अच्छे से अच्छे परफॉर्मेंस महेंद्र सिंह धोनी को दिया है जैसे मान हुए लोग अपनी प्राइम टाइम में खेल रही हूँ पता नहीं धोनी के अंदर ऐसी कौन सी क्वालिटी थी जो हर खिलाड़ी सपना प्राइम टाइम निकलवा लिया करती थी इनकी टीम में बोहोत सारे ऐसे खिलाड़ी आयी है जून की टीम से खेलकर ही रिटायर ले चुके पहुँचा जैसे खिलाड़ियों जिनकी उम्र 40 के आस पास भी हुआ करती थी इनकी टीम लेकिन फिर भी ये लोग फ़ाइनल तक का सफ़र तय करते थे
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